उच्च माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों के सामाजिक एवं मानसिक विकास के संदर्भ    में शैक्षिक अभिरुचि का अध्ययन

Authors

  • अशोक कुमार and  डॉ०-अबधेश सिंह

Abstract

 

 

प्रस्तुत अध्ययन उच्च माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों के सामाजिक एवं मानसिक विकास के संदर्भ में शैक्षिक अभिरुचि की भूमिका का अनुभवजन्य अध्ययन प्रस्तुत करता है। शैक्षिक अभिरुचि को केवल किसी विषय के प्रति पसंद या परीक्षा में उपलब्धि की आकांक्षा तक सीमित नहीं माना गया है, बल्कि इसे जिज्ञासा, सीखने में संलग्नता, ध्यान, सक्रिय भागीदारी और सीखने के अनुभव के प्रति सकारात्मक उन्मुखता से संबंधित व्यापक अवधारणा के रूप में देखा गया है। अध्ययन में 400 विद्यार्थियों से प्राप्त प्रतिक्रियाओं के आधार पर सामाजिक विकास से संबंधित आठ तथा मानसिक विकास से संबंधित आठ कथनों का विश्लेषण किया गया। पाँच-बिंदु लिकर्ट मापनी पर प्राप्त प्रतिक्रियाओं के लिए आवृत्ति, प्रतिशत, भारित स्कोर, माध्य तथा मानक विचलन का उपयोग किया गया। सामाजिक विकास के आठ कथनों के माध्य 3.99 से 4.17 तथा मानसिक विकास के आठ कथनों के माध्य 4.05 से 4.15 के बीच रहे। सामाजिक विकास में मित्रों के साथ मधुर संबंध, सहपाठियों से सकारात्मक जुड़ाव, विद्यालय एवं सामाजिक गतिविधियों में सहभागिता, सामाजिक स्वीकार्यता और सहयोग से संबंधित प्रतिक्रियाएँ अनुकूल रहीं। मानसिक विकास में सोचने और तर्क करने, समस्या समाधान, स्मरणशक्ति, योजनाबद्ध कार्य, ध्यान, मानसिक परिपक्वता, आलोचनात्मक सोच तथा सीखने की क्षमता से संबंधित प्रतिक्रियाएँ भी अनुकूल दिशा में रहीं। उपलब्ध साहित्य में शैक्षणिक रुचि, सामाजिक समर्थन, विद्यालयीय संबद्धता, सामाजिक-भावनात्मक कौशल, भावनात्मक बुद्धिमत्ता तथा सीखने की संलग्नता के बीच संबंधों पर पर्याप्त ध्यान दिया गया है। वर्तमान अध्ययन इन प्रवृत्तियों को उच्च माध्यमिक विद्यार्थियों के सामाजिक एवं मानसिक विकास के संदर्भ में एक साथ देखने का प्रयास करता है।

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Published

2026-10-10

How to Cite

अशोक कुमार and  डॉ०-अबधेश सिंह. (2026). उच्च माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों के सामाजिक एवं मानसिक विकास के संदर्भ    में शैक्षिक अभिरुचि का अध्ययन. INTERNATIONAL JOURNAL OF SOCIAL SCIENCE & INTERDISCIPLINARY RESEARCH ISSN: 2277-3630 Impact Factor: 8.036, 15(06), 113–121. Retrieved from https://www.gejournal.net/index.php/IJSSIR/article/view/2993