भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में क्रांतिकारी संगठन एच० एस० आर० ए० की भूमिका

Authors

  • डॉ० रणबीर सिंह

Abstract

 ब्रिटिश शासन के लगभग 100 वर्षों के भयंकर राजनीतिक, आर्थिक, धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक शोषण के खिलाफ अनेक आदिवासी एवं किसान आंदोलन हुए।  किंतु जो प्रबल रूप से अंग्रेजों के खिलाफ प्रथम व्यापक विरोध हुआ उसे 1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम कहा जाता है। 1857 के विद्रोह के अमानुषिक अत्याचार के पश्चात ब्रिटिश सत्ता की स्थापना हुई। किंतु सच में असफल क्रांति के पश्चात राष्ट्रीय भावनाओं को प्रोत्साहन, भारतीय धर्म और संस्कृति का पुनर्जागरण भी हुआ। भविष्य में जन भावनाएं दिन-प्रतिदिन उग्र होती चली गई और इसी का परिणाम 1885 में एक अखिल भारतीय संगठन के रूप में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना की हुई | जिसका उद्देश्य जाति, वर्ण, धर्म, प्रांत व किसी अन्य भेदभाव के बिना सभी भारतीयों का प्रतिनिधित्व करना था। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के विभिन्न उदारवादी, उग्रवादी एवं गांधीवादी चरणों में अनेक आंदोलनो ने भारत और ब्रिटिश के आपसी संबंध विरोधी बना दिए। गांधी युग में तो हर मुख से स्वतंत्रता की मांग और राष्ट्रीयता जन-जन की वस्तु बन चुकी थी।1

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Published

2026-08-11

How to Cite

डॉ० रणबीर सिंह. (2026). भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में क्रांतिकारी संगठन एच० एस० आर० ए० की भूमिका. INTERNATIONAL JOURNAL OF SOCIAL SCIENCE & INTERDISCIPLINARY RESEARCH ISSN: 2277-3630 Impact Factor: 8.036, 15(7), 26–30. Retrieved from https://www.gejournal.net/index.php/IJSSIR/article/view/2963