समकालीन भारतीय राजनीति में सामाजिक न्याय और समाजवाद
Abstract
सामाजिक न्याय और समाजवाद भारतीय लोकतंत्र की वैचारिक एवं संवैधानिक आधारशिलाओं में प्रमुख स्थान रखते हैं। भारतीय संविधान की प्रस्तावना, मौलिक अधिकारों तथा राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों में इन दोनों सिद्धांतों का स्पष्ट प्रतिबिंब दिखाई देता है। सामाजिक न्याय का उद्देश्य समाज के सभी वर्गों, विशेषकर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, महिलाओं, अल्पसंख्यकों तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को समान अवसर, सम्मान और न्याय उपलब्ध कराना है। दूसरी ओर, समाजवाद आर्थिक संसाधनों के न्यायसंगत वितरण, आय और संपत्ति की असमानताओं को कम करने तथा कल्याणकारी राज्य की स्थापना पर बल देता है।